जायजा डेली न्यूज़ लखनऊ ( ज़हीर इक़बाल )उत्तर प्रदेश में जन समस्याओं के लिए लगातार आंदोलन करके कांग्रेस ने प्रदेश में अपने लिए जगह बनाली है। उत्तर प्रदेश की मुख्य क्षेत्रीय पार्टियों में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी एक खास मुकाम रखती थी परंतु मौजूदा समय में कांग्रेस ने इन क्षेत्रीय पार्टियों को पीछे करके उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी पार्टी बनकर उभरी हैं। उधर उत्तर प्रदेश में चंद्रशेखर आजाद की भीम आर्मी की आहट भी साफ महसूस की जारही है भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद उत्तर प्रदेश में दलितों में अपनी पकड़ बनाने में धीरे धीरे कामयाब हो रहे हैं।

शुक्रवार को विधानसभा के सामने उनके कार्यकर्ताओं ने कूड़ा फेक कर हाथरस की घटना पर विरोध किया इसके अलावा प्रदेश के कई इलाकों में सफाई कर्मचारियों ने भीम आर्मी के बैनर तले छोटे-छोटे प्रदर्शन किए उत्तर प्रदेश में मुख्य विपक्षी दलों में समाजवादी पार्टी बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल का शुमार किया जाता है। लेकिन मौजूदा समय में दोनों पार्टियों के प्रमुख सिर्फ ट्विटर से काम चला रहे हैं। समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता तो कम से कम सड़क पर नजर भी आ रहे हैं।

बीएसपी तो उससे भी गई गुजरी पार्टी होकर रह गई है यूपी बीएसपी में कार्यकर्ताओं को बगैर निर्देश के कोई धरना प्रदर्शन प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की इजाजत नहीं होती है। लेकिन समाजवादी पार्टी प्रदेश की वह पार्टी है जिसके नेता सड़क पर विरोध प्रदर्शन करने के आदी हैं। लेकिन मौजूदा समय में कॉन्ग्रेस उत्तर प्रदेश में मुख विपक्षी दल की भूमिका में नजर आ रही है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव इस समय विदेश गए हुए हैं। वो लगातार ट्वीट्स कर रहे हैं लेकिन उनकी पार्टी को इस मामले में सामने आते-आते थोड़ा समय लग गया है।इस दौरान सपा कार्यकर्ताओं ने कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए. उन्होंने लखनऊ और कानपुर में धरना दिया और मार्च निकाला।वहीं, बसपा इस पूरे मामले में नदारद नज़र आ रही है। बसपा प्रमुख दलितों की नेता मानी जाती हैं।

उनका प्रमुख वोट बैंक भी दलित ही रहा है लेकिन फिर भी वो कांग्रेस और सपा दोनों से पीछे दिख रही हैं। उन्होंने भी कुछ ट्वीट्स किए हैं और बसपा कार्यकर्ताओं ने रानी तालाब इलाक़े में नारेबाजी की है। लेकिन, मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर जिस तरह राहुल गांधी और प्रियंका गांधी खुलकर सामने आए हैं, उस तरह सपा-बसपा नज़र नहीं आई हैं। इससे पहले भी प्रवासी मज़दूरों के लिए बसें ले जाने से लेकर सोनभद्र में दलित परिवार के 11 लोगों की हत्या के मामले में प्रियंका गांधी बढ़ चढ़कर सामने आई थीं। ऐसे में चर्चा होने लगी है कि उत्तर प्रदेश की क्षेत्रीय पार्टियां कहां हैं।और क्या कांग्रेस अपनी पुरानी भूलों को सुधारते हुए यूपी में आधार बढ़ा रही है। बसपा प्रमुख मायावती ने हाथरस मामले में लगातार कई ट्वीट करके सीबीआई जांच की मांग की है।उन्होंने यूपी सरकार और पुलिस के रवैये की निंदा की है। लेकिन, समाजवादी पार्टी इस मामले में बसपा से ज़्यादा सक्रीय दिख रही है। सपा कार्यकर्ताओं ने लखनऊ और कानपुर में विरोध प्रदर्शन किया। लखनऊ में पुलिस ने लाठी चार्ज भी किया। इससे पहले सपा की महिला कार्यकर्ताओं ने कैंडल मार्च भी निकाला था। हाथरस में दलित युवती के साथ गैंगरपे के मामले को लेकर पूरे देश में हंगामा है. कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन और कैंडल मार्च निकाले जा रहे हैं। इन विरोध प्रदर्शनों के बीच राजनेताओं में जो दो नाम सबसे ज़्यादा सामने आ रहे हैं, वो हैं कांग्रेस नेता राहुल गांधी और उनकी बहन और यूपी कांग्रेस प्रभारी प्रियंका गांधी।भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आज़ाद हाथरस मामले में लगातार उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं। रविवार को मृतक दलित युवती के परिवार से भी मिलने जा रहे हैं। उन्होंने शनिवार को ट्वीट किया था कि उन्हें शक है कि सरकार पीड़ित परिवार को ही दोषी बना देगी। इस मामले को लेकर आज़ार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं।इससे पहले दो अटूक्बर को उन्होंने और उनकी आज़ाद समाज पार्टी के लोगों नें दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन भी किया था।

हाथरस सपा और लोकदल प्रतिनिधिमंडल पीड़ित परिवार से मिले कई जगहा लाठी चार्ज जायजा डेली न्यूज़ लखनऊ ( संवाददाता ) हाथरस मामले में आज भी वहां के जिलाधिकारी को सस्पेंड किए जाने का मामला छाया रहा कांग्रेस ने मुख्य रूप से सवाल किया  कि सरकार हाथरस के लिए जिला अधिकारी को क्यों बचा रही है। उधर आज समाजवादी पार्टी राष्ट्रीय लोक दल के प्रतिनिधि दल हाथरस पीड़िता के परिवार से मिलने गए लोकदल के प्रमुख अजीत सिंह के बेटे जयंत चौधरी हाथरस जाते समय पुल पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया वही समाजवादी पार्टी के नेताओं पर भी लाठीचार्ज हुआ है। रालोद के कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज भी हुआ है हालांकि रालोद नेता जयंत चौधरी ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की है। उन्होंने कहा कि अगर यह कहा जा रहा है कि राजनीति की जा रही है तब मैं कहूँगा कि राजनीति होनी चाहिए क्योंकि महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध का आंकड़ा काफी बढ़ चुका है तो इसलिए इस पर राजनीति हो रही है तो यह सही हो रही है। कांग्रेस में प्रदेश में हाथरस के जिला अधिकारी को हटाया जाए के लिए प्रदर्शन किए हैं। वही आज पीड़िता के गांव बयान लेने गई एटीएस के अधिकारियों ने पीड़िता के पिता को अस्पताल में एडमिट कराया है। बताया गया है कि पीड़िता के पिता बीमार हो गए। मृत युवती के पिता बीमार पड़ गए हैं। एसआईटी उनके घर पूछताछ पहुँचने के लिए पहुँची थी। हाथरस के मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि एसआईटी ने मृतका के पिता के बीमार पड़ने पर कॉल किया था। उन्होंने बताया कि, “उनका (मृतका के पिता) रक्त चाप सामान्य है और दूसरे जरूरी टेस्ट भी करवाए गए हैं। लेकिन उनकी कोरोना की जांच नहीं करवाई गई है।”हाथरस के एसपी विनीत जायसवाल ने रविवार की सुबह अपराध स्थल का दौरा किया है।हाथरस मामले में डीएम पर कार्रवाई न होने पर मायावती ने सरकार पर निशाना साधा। मायावती ने ट्वीट किया, ‘हाथरस गैंगरेप कांड के पीड़ित परिवार ने जिले के डीएम पर धमकाने आदि के कई गंभीर आरोप लगाए हैं, फिर भी यूपी सरकार की रहस्मय चुप्पी दुःखद और अति-चिंताजनक। हालांकि सरकार सीबीआई जांच हेतु राजी हुई है, लेकिन उस डीएम के वहां रहते इस मामले की निष्पक्ष जांच कैसे हो सकती है? लोग आशंकित।’बाहुबली रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने ट्वीट किया, ‘हम सभी सहमत हैं कि हाथरस काण्ड में स्थानीय प्रशासन ने असंवेदनशीलता बरती, पर आश्चर्य है कि CBI जाँच के निर्णय से कई लोगों के पेट में दर्द शुरू हो गया है। समय के साथ सच्चाई सामने आयेगी, सत्यमेव जयते।’आम आदमी पार्टी का प्रतिनिधिमंडल कल जाएगा हाथरसउत्तर प्रदेश प्रभारी संजय सिंह और केजरीवाल सरकार के कैबिनेट मंत्री करेंगे दल का नेतृत्व दिल्ली सरकार के SC/ST और महिला और बाल कल्याण मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा होंगे।

करणी सेना अभियुक्तों के समर्थन में चंद्रशेखर के पहुंचने पर तनाव का माहौल
भीम आर्मी के नेता चंद्रशेखर आज़ाद के पीड़ित परिवार के गांव जाने की ख़बर के बाद अब करणी सेना ने अपनी एक टीम सच्चाई पता करने के लिए वहां भेजी है। करणी सेना के सुभाष सिंह का कहना है कि वो गांव में इसलिए मौजूद हैं क्योंकि चंद्रशेखर वहाँ पहुँच रहे हैं। वो कहते हैं, “हमें सुशांत सिंह राजपूत के मामले में न्याय मिला क्योंकि मीडिया ने मदद की। अब हम यहाँ देखेंगे कि सच्चाई क्या है।”दूसरी तरफ सवर्ण समाज के कुछ संगठन गांव में अभियुक्तों के समर्थन में भी बैठे हुए हैं। सवर्ण समाज के लोगों ने अभियुक्तों पर लगे आरोपों को झूठा करार दिया है और इसे निराधार बताया है। मृत युवती के गांव में भारी तनाव का माहौल है।कुछ सवर्ण संगठनों ने भी यहाँ पर अभियुक्तों के समर्थन में विरोध-प्रदर्शन किया है और भीम आर्मी के ख़िलाफ़ नारेबाजी की है। दूसरी ओर, भीम आर्मी के चीफ़ चंद्रशेखर ने पैदल ही गांव की ओर बढ़ना शुरू कर दिया था क्योंकि 20-25 किलोमीटर पहले ही उनकी गाड़ियों को रोक दिया गया था। लेकिन अब कुछ दूर पैदल चलने के बाद उन्हें दस लोगों के साथ यहाँ पहुँचने की अनुमति मिल गई है. पुलिस बल बड़े पैमाने पर गांव में तैनात है और तनाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है। भीम आर्मी चीफ़ चंद्रशेखर आज़ाद हाथरस में पीड़ित परिवार से मिले हैं।उन्होंने पीड़ित परिवार से मिलने के बाद उनके लिए सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने कहा है कि परिवार गांव में सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा है कि, “मैं परिवार के लिए ‘वाई’ स्तर की सुरक्षा की मांग करता हूँ या फिर मैं परिवार को अपने घर ले जाऊंगा। वो यहां सुरक्षित नहीं है। हम सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच चाहते हैं।” हालांकि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने हाथरस की घटना की सीबीआई से जांच कराने का फ़ैसला किया है।

 

 

 

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