जायज़ा डेली न्यूज़ दिल्ली \लखनऊ (संवाददाता ) कोविड-19 के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए, नए साल के जश्न को प्रतिबंधित करना आवश्यक हो गया है। सार्वजनिक स्थानों पर समारोहों से बचना चाहिए। हम नए साल के जश्न के लिए नए नियमों को अंतिम रूप देंगे और उन्हें जनता तक पहुंचाएंगे। कोरोना वायरस संक्रमण और इसके नए वैरियंट को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार बेहद गंभीर है। प्रदेश सरकार ने नए वर्ष के हर कार्यक्रम की अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया है। नए वर्ष के आयोजन में किसी भी कार्यक्रम में कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने पर आयोजकों के साथ इसमें शामिल होने वालों पर कार्रवाई होगी। उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने नववर्ष के कार्यक्रमों में कोविड-19 के प्रभावी नियंत्रण व रोकथाम के लिए विशेष सजगता एवं सावधानी बरते जाने के साथ ही कोविड प्रोटोकॉल व गाइडलाइंस का पूर्णत: पालन कराने के सम्बन्ध में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किया है। इसमें कहा गया है कि समस्त मण्डलायुक्त, अपर पुलिस महानिदेशक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस उप महानिरीक्षक रेंज, पुलिस आयुक्त लखनऊ एवं गौतमबुद्ध नगर, सभी जिलाधिकारी एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक इन दिशा-निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराएं।
यूके और बाद में फ्रांस, स्पेन, स्वीडन और कनाडा में पाए गए नए कोरोना वायरस के नए वेरिएंट को देखते हुए कई राज्यों ने नए साल के जश्न के आगे प्रतिबंधों का नवीनीकरण किया है। राज्यों ने कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने में मदद करने के लिए बरती जाने वाली सावधानियों को भी सूचीबद्ध किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय के डैशबोर्ड के अनुसार इससे देश में दैनिक Covid-19 मामलों में कमी आई है।
इधर, भारत में भी अलग-अलग राज्यों में कई तरह की पाबंदियां लगाई जा रही हैं-
महाराष्ट्र: राज्य ने सभी शहरों और नगर निगम क्षेत्रों में सात घंटे के रात के कर्फ्यू की घोषणा की गई है। 22 दिसंबर से रात 11 बजे से 6 बजे तक कर्फ्यू लगा हुआ है, और यह 5 जनवरी, 2021 तक जारी रहेगा।
तमिलनाडु: राज्य सरकार ने 31 दिसंबर और 1 जनवरी, 2021 की रात समुद्र तटों, होटलों, क्लबों और रिसॉर्ट्स पर नए साल के जश्न पर प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। इन दिनों समुद्र तटों पर कोई प्रवेश नहीं होगा, और कोई मध्यरात्रि कार्यक्रम नहीं होगा। एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि समुद्र तट की सड़कों, रेस्तरां, होटल, क्लब, बीच रिसॉर्ट्स सहित रिसॉर्ट्स जैसी जगहों पर नए साल के अगले दिन अनुमति दी जाएगी।
कर्नाटक: रात के कर्फ्यू आदेश को वापस लेने के बाद, कर्नाटक ने 30 दिसंबर से 2 जनवरी तक क्लबों, पब, रेस्तरां या इसी तरह के स्थानों में सोशल डिस्टेंसिंग के बिना सामूहिक समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया है।
राजस्थान: राजस्थान में 31 दिसंबर को शाम 8 बजे से 1 जनवरी को सुबह 6 बजे तक कर्फ्यू लगाया जाएगा।
उत्तराखंड: राज्य की राजधानी देहरादून ने नए साल की पूर्व संध्या और नए साल पर होटल, बार और रेस्तरां में पार्टियों जैसे सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगा दिया है

कृषि कानूनों के खिलाफ वोट करने वाली टीआरएस का यू-टर्न, कहा- अनाज खरीदना सरकार का काम नहीं कांग्रेस ने साधा निशाना
जायज़ा डेली न्यूज़ दिल्ली (संवाददाता )नए कृषि कानूनों को विरोध करने वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने अब यू-टर्ट ने लिया है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने कहा है कि किसानों को अपने अनाज को कहीं भी बेचने की अनुमति देने के लिए राज्य सरकार को अनाज की खरीद करने की कोई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि नए कृषि कानून देशभर में लागू किया जा रहे हैं। बता दें कि इससे पहले केसीआर ने केंद्र के कृषि कानूनों के खिलाफ भारत बंद का समर्थन किया था। पार्टी का यह रुख पिछले दिनों दिल्ली में केसीआर के पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के मुलाकात के बाद देखने को मिला है। जबकि पार्टी ने इससे पहले संसद में इस कानून के खिलाफ वोट किया था। रविवार की शाम मुख्यमंत्री चंद्रशेखर राव की ओर से एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई गई थी जिसमें कृषि उपज की बिक्री और खरीद की प्रक्रिया पर चर्चा करनी थी, लेकिन अब इसे बाजारा पर छोड़ दिया गया है। बैठक के मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी किए गए बयान में कहा है कि सरकार अब ऐसा नहीं कर सकती है। क्योंकि यह एक व्यापारिक संगठन या व्यापारी नहीं है। सरकार राइस मिलर या दाल मिलर नहीं है। बिक्री और खरीद सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। सरकार ने कहा कि अगले साल से गांव में खरीद केंद्र स्थापित करना संभव नहीं है। हालांकि, केसीआर ने अनाज की ठीक से खरीदारी और ब्रिक्री के निर्देश दिए हैं। उन्होंने सुझाव दिया है कि किसानों को एक बार में ही अपनी पूरी उपज को बाजारों में नहीं लाना चाहिए, ताकि उन्हें बेहतर मूल्य मिल सकेगा।पिछले सीजन में सरकार ने सभी गांवों में खरीदी केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए थे। सरकार ने कहा कि उसे धान, सरसो, मक्का, लाल चना, बेंगल चना और सूरजमुखी की खरीद से 7500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। हालांकि सरकार ने इन फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का भुगतान किया था, लेकिन इसे उन्हें बाजार में कम कीमतों पर बेचना पड़ा, क्योंकि इन फसलों डिमांड नहीं थी। बता दें कि हाल ही में मुख्यमंत्री केसीआर ने कृषि कानूनों को विरोध किया था और कहा था कि वो किसानों के हितों को नुकसान पहुंचाएंगे। सितंबर में जब संसद में यह कानून पेश किया गया था तब भी टीआरएस अध्यक्ष ने अपनी पार्टी के सांसदों को बिलों के खिलाफ मतदान करने का निर्देश दिया था। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एम कोडंडा रेड्डी ने कृषि कानूनों पर यू-टर्न लेने के लिए मुख्यमंत्री केसीआर की लताड़ भी लगाई है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार एमएसपी में कृषि उत्पाद खरीदने की अपनी जिम्मेदारी से पीछे हट रही है। रेड्डी ने यह भी आरोप लगाया कि केसीआर ने पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से हाल ही में मुलाकात के बाद यू-टर्न लिया है।

असम सरकार ने सभी सरकारी मदरसों को बंद करने वाला विधेयक किया पेश
जायज़ा डेली न्यूज़ दिल्ली (संवाददाता ) असम सरकार ने एक अप्रैल 2021 से राज्य में सभी सरकारी मदरसों को बंद करने और उन्हें स्कूलों में बदलने संबंधी एक विधेयक सोमवार को विधानसभा में पेश किया। विपक्ष की आपत्ति के बावजूद शिक्षा मंत्री हेमंत बिस्व सरमा ने विधानसभा के तीन दिवसीय शीतकालीन सत्र के पहले दिन असम निरसन विधेयक, 2020 को पेश किया। विधेयक में दो मौजूदों कानूनों असम मदरसा शिक्षा (प्रांतीयकरण) कानून, 1995 और असम मदरसा शिक्षा (कर्मचारियों की सेवा का प्रांतीयकरण और मदरसा शिक्षण संस्थानों का पुनर्गठन) कानून, 2018 को निरस्त करने का प्रस्ताव दिया गया है। शर्मा ने कहा, ”विधेयक निजी मदरसे पर नियंत्रण और उनको बंद करने के लिए नहीं है। उन्होंने कहा कि विधेयक के ‘लक्ष्यों और उद्देश्यों के बयान में ‘निजी शब्द गलती से शामिल हो गया। उन्होंने कहा कि सभी मदरसे उच्च प्राथमिक, उच्च और माध्यमिक स्कूलों में बदले जाएंगे और शिक्षक तथा गैर शिक्षण कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और सेवा शर्तों में कोई बदलाव नहीं होगा। मंत्री ने पूर्व में कहा था कि असम में सरकार संचालित 610 मदरसे हैं।

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